Wednesday, June 29, 2016

आधी लकीर

होता है दिल में दर्द
बताना ही चाहें सब,
जरूरी तो नहीं....?

प्यार, प्यार ही होता है
पर निभाना जरूरी तो नहीं...?

दिलों में खलिश
यूं भी हो सकती है
दूरी ही हो जरूरी तो नहीं...!

ख्वाहिश, ख्वाहिश है
आधी है तो भी सही
पूरी हो जरूरी तो नहीं...!

तुमको उम्मीदें,
तो तुम्हारी ही होगी,
शिकन, किसी और के,
माथे पे हो जरूरी तो नहीं...!

मिला भी और नहीं भी
लकीर आधी भी थी
मेरी हथेली में पूरी तो नहीं....!

तू ही वजह हो जीने की
जरूरी तो नहीं...?

मुहब्बत....मुहब्बत है,
मजबूरी तो नहीं....!

1 comment:

amanjot gill said...

जो भी लिखा अच्छा ही लिखा हो
यह जरूरी तो नहीं ?