From Inside.......
हर शख्स मुझे ताश के पत्तों सा खेलता रहा
जीतने वाले ने भी फेका हारने वाला भी फेकता रहा
मुश्किलों से जब भी बनाये मैंने रेत के घरौंदे
कभी हवाओं ने तोड़े कभी लहरें ने मैं साहिल पे खड़ा देखता रहा
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