
हर बस..........
चल कर फिर वहीं
लौट आती है!
जैसे एक पीढी,
दूसरी को दोहराती है,
अनुभव यात्रियों जैसे हैं,
पीढी दर पीढी,
चढ़ते उतरते हैं!
कुछ यात्री,
पीढियों को,
याद रह जाते हैं,
जिनमे से कुछ
"बापू" कहलाते हैं!
चल कर फिर वहीं
लौट आती है!
जैसे एक पीढी,
दूसरी को दोहराती है,
अनुभव यात्रियों जैसे हैं,
पीढी दर पीढी,
चढ़ते उतरते हैं!
कुछ यात्री,
पीढियों को,
याद रह जाते हैं,
जिनमे से कुछ
"बापू" कहलाते हैं!
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