Thursday, November 5, 2009

वो मेरे हर्फ़ क्या समझेगा..........

कहते हैं लोग.....
गूँज सन्नाटे की है,
आवाज़ सबसे तेज़..............

तो इक सवाल उठ गया दिल में........

जो मेरी चुप्पी न समझा,
वो मेरे हर्फ़ क्या समझेगा..........

2 comments:

sakhi with feelings said...

hmmmmmmmmmmmmmmmmmm
chuppi samjhi ja skati hai jahan rista ruh ka ho..

Piyush k Mishra said...

ishaaron mein baat karne waale achhe lagte hain
magar koi kab tak khamoshiyon ko samjhe....


he he he

badhiya hai Gaurav bhai