Friday, August 28, 2009

दुल्हन.......

कुछ सुबहें और शामे जिन्दगी भर याद रह जाती हैं............
एक सुबह ऐसी ही गुजरी थी.......


पत्तों पे जमी ओस,
चमकने लगी है,
रात का स्याह घूंघट,
जो हट रहा है........

हया की लाली,
नज़र आने लगी है,
खुश हैं परिंदे...........
कि दुल्हन आने को है,
फिजा में,
फैलने लगी है खुशबू

सुबह बन के हसीना,
अलसाई सी है,
उठ रही है,

अभी अंगडाई ली है...............

1 comment:

Priya said...

bahut hi sunder hai .....par laga ki adhoori hai....ho sake to poora kar de ise