चले जाओ,
कुछ है,
जो तुम्हे छोड़ के जाना होगा।
ये रंग ए इश्क है,
सिर्फ गहरा होगा
जितना भी पुराना होगा..!!
पलके मूंद लेंगे,
और नाम लेंगे तुम्हारा
जब भी तुमको बुलाना होगा
अरमान ओ जुस्तजू में बगावत होगी
कदम अदावत करेंगे
मैं बुलाऊंगा,
और तुमको आना होगा
मैं अपने कायदे से,
फिर नहीं सकता अब
ये रस्म ए वफ़ा,
निभानी होगी मुझे
तुम न होगे तो,
तुम्हारी जगह मयखाना होगा
अब मुझे फिक्र नहीं है,
किसी शै की,
किसी को रुसवा होना हुआ,
तो ज़माना होगा
वहीं होगी तस्बीह,
जहां मिले थे पहली दफा
तौर ए हद ए अंजाम
फिर वहीं जाना होगा
फिर बुलाऊंगा,
तो तुम्हे आना होगा
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