मैं चाँद लिखूँ
तुम आसमान लिखो
मैं ख़ुद को तुम लिख दूँ
तुम मुझे
इक अनजान लिखो
मैं तुमको चाँद लिखूँ
इक आसमानी एहसान लिखूँ
तुम मेरे जिस्म पे,
नक़्श बनाओ कुछ,
मैं तुम्हारी रूह पे,
अपना निशान लिखूँ
आओ हर लम्हे को,
नबी बना दूँ,
हर रात को,
क़ुरान लिखूँ...
तुम ज़िन्दगी की
सुनहरी आयतें लिखो,
मैं साँसो का,
गुलाबी फ़रमान लिखूँ,
दीवारों को,
ख़ुशी लिख डालें,
मस्ती में घर को,
जन्नत लिख दें,
तुम दरवाज़ों को
चंदन लिख दो,
मैं खिड़कियों को
गुलदान लिखूँ....
सब पत्थरों को,
घोल कर,
पानी कर दें.....
सब दर्दों को मिल के,
पी जायें...
बाहों में समेटे तुंम्हे,
इस रात को रमज़ान लिखूँ...
तुम ज़िन्दगी की आयतें लिखो,
मैं साँसो का फ़रमान लिखूँ,
बाहों में समेटे तुंम्हे,
इस रात को रमज़ान लिखूँ...
मैं तुमको चाँद लिखूँ
इक आसमानी एहसान लिखूँ
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