Saturday, September 24, 2016

लड़ रहे हैं..!!

सुबह दूध के लिए लाइन में लड़ रहे हैं
दोपहर बिल जमा करने के लिए लड़ रहे हैं
बच्चे के एडमिशन के लिए स्कूल में लड़ रहे हैं
कूड़ा फेकने के लिए पडोसी से लड़ रहे हैं
रिपोर्ट लिखाने के लिए थाने में लड़ रहे हैं
डिग्री का ढेर लिए नौकरी पाने के लिए लड़ रहे हैं
सीमा पर देश बचाने के लिए लड़ रहे हैं
कुलचे के ठेले पर गरीब बच्चे जूठन खाने के लिए लड़ रहे हैं
कुछ बकरे की कुर्बानी पर आमादा कुछ बचाने को लड़ रहे हैं
मूर्ती न फेको गंगा में, तो कुछ नहाने के लिए लड़ रहे हैं
मीडिया डाल रहा पर्दा तो लड़के सच बताने के लिए लड़ रहे हैं
ठेके पे बोतल पाने के लिए लड़ रहे हैं
गणेश को दूध पिलाने को लड़ रहे हैं
कुछ जंगल तो कुछ गाय बचाने को लड़ रहे हैं
कुछ पानी बचा रहे हैं तो कुछ बहाने को लड़ रहे हैं
बहुतों ने छोड़ दिया कुछ देश में आने को लड़ रहे हैं
राम बड़ा या अल्लाह कुछ ये आज़माने को लड़ रहे हैं
अपनी नफ़्स से हम जमाने से लड़ रहे हैं।

लड़ रहे हैं लड़ रहे हैं लड़ रहे हैं लड़ रहे हैं

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