Thursday, January 8, 2026

मैं चाँद लिखूँ

मैं चाँद लिखूँ 

तुम आसमान लिखो


मैं ख़ुद को तुम लिख दूँ 

तुम मुझे

इक अनजान लिखो


मैं तुमको चाँद लिखूँ

इक आसमानी एहसान लिखूँ 


तुम मेरे जिस्म पे,

नक़्श बनाओ कुछ,


मैं तुम्हारी रूह पे,

अपना निशान लिखूँ 


आओ हर लम्हे को,

नबी बना दूँ,

हर रात को,

क़ुरान लिखूँ...


तुम ज़िन्दगी की 

सुनहरी आयतें लिखो,

मैं साँसो का,

गुलाबी फ़रमान लिखूँ,


दीवारों को,

ख़ुशी लिख डालें,

मस्ती में घर को,

जन्नत लिख दें,


तुम दरवाज़ों को

चंदन लिख दो, 

मैं खिड़कियों को 

गुलदान लिखूँ....


सब पत्थरों को,

घोल कर,

पानी कर दें.....

सब दर्दों को मिल के,

पी जायें...


बाहों में समेटे तुंम्हे,

इस रात को रमज़ान लिखूँ...


तुम ज़िन्दगी की आयतें लिखो,

मैं साँसो का फ़रमान लिखूँ,


बाहों में समेटे तुंम्हे,

इस रात को रमज़ान लिखूँ...


मैं तुमको चाँद लिखूँ

इक आसमानी एहसान लिखूँ